कई सालों बाद आया हूँ
वही चोराहे, वही गालिया
सोच के मैं वापिस
कई सालों बाद आया हूँ||
कुछ नया सा लग रहा है
बदली- बदली सी हवा है
गायब है वो खुशबू गाँव वाली
गायब है वो चहल- पहल पहले वाली||
एक न्या रूप ले लिया है
जैसे देश से बाहर हो
उजड गया है, जंग खा गया है
जैसे कोई पूरानी मशीन हो
या को विलिन हुआ डूबा जहाज||
सुनसान सा पड़ गया है
लोगों के प्लायन से
बाकि जो बचा है
वो गरीबी और बुखमरी का दृश्य है||
कोई पहचानता नहीं हो
जो पहचाने वो बोले,
सुहाने मौसम की तरह
तुम भी बड़े पल बाद आए हो||
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